PODCAST · arts
Sambandh Ka Ke Ki
by Himanshu Bhagat
A conversation on books, conducted in Hindi.
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एपिसोड 47: 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' − मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी
भारत के आज़ादी के दो साल पहले से ही देश के बँटवारे की सम्भावना बढ़ने लगी और सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा। अगस्त १९४६ से देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे छिड़ गए। महात्मा गांधी बंगाल (कलकत्ता व नोआखाली), बिहार, और दिल्ली जा के शांति के लिए सत्याग्रह करने लगे। अपने जीवन के आखिरी पंद्रह महीनों में गांधी शांति का सन्देश ले के पैदल गाँव-गाँव गए। मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी की किताब, 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' उनके जीवन के इस दौर का एक गहरा अध्यन है। किताब में गांधी की यात्रा-कार्यक्रम, दिनचर्या, राजनैतिक गतिविधियों, उनके करीबी सहयोगियों, और उनके विवादित यौन-प्रयोग के अलावा, उनकी विडम्बनाओं, दर्द और बेबसी का विवरण है। और इसके साथ है, जन-संहार के सन्दर्भ में अहिंसा, सत्याग्रह, शांति, क्षमा, सर्व-धर्म-संभव जैसे गांधीवादी मूल्यों की जाँच। सुनिए किताब पर एक चर्चा मानष के साथ।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी एक्स (ट्विटर) पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी फेसबुक पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी 'गांधी− द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 46: 'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' − शुद्धब्रता सेनगुप्ता
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर ख़ालिद को साल २०१६ में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। आने वाले सालों में, उमर बहुसंख्यकवादी हिंदुत्व, बेलगाम पूंजीवाद, और सत्तारूढ़ ताक़तों के निर्भीक और बेबाक आलोचक के रूप में उभरे। सी.ए.ए.−एन.आर.सी. क़ानून-विरोधी शाहहीन बाघ आंदोलन का उमर ने खुलकर समर्थन किया। सितम्बर २०२० में आतंक-विरोधी यू.ए.पी.ए. क़ानून के तहत, २०२० के दिल्ली दंगो को भड़काने की साज़िश रचने के लिए उमर को गिरफ्तार कर लिया गया। आज तक इस केस पर मुक़दमा शुरू नहीं हुआ है और पिछले साढ़े-पाँच साल से उमर जेल में बंद हैं। सुनिए 'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' यानी 'उमर ख़ालिद और उसकी दुनिया' किताब के संपादक और उमर के मित्र, शुद्धब्रता सेनगुप्ता, के साथ किताब पर एक चर्चा। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर शुद्धब्रता सेनगुप्ताफेसबुक पर शुद्धब्रता सेनगुप्ता'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 45: 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट − द अनमेकिंग ऑफ़ अ डेमोक्रेसी' − राहुल भाटिया
वर्ष २०१३-१४ में पत्रकार राहुल भाटिया ने पाया कि उनके प्रियजन बदल गए हैं। उनकी सोच, उनकी भाषा में बदलाव आ गया है − समाज में एक धर्मविशेष लोगों के प्रति। यह देख के राहुल कुछ हतप्रभ, कुछ परेशान हुए, और इसी परेशानी से उबरने के लिए उन्होंने लिखा है, 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट'। इस किताब का पहला भाग हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद का अध्यन है − आज के भारत में उनके दुष्प्रभाव का, उनके जड़ों, और उनके उद्भव का। किताब का दूसरा भाग भी एक अध्यन है − आधार या 'युनीक आइडेंटिटी प्रोजेक्ट' का। कैसे एक केंद्रीय गृह मंत्री के मन में आया विचार, प्रशासकों, विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व वकीलों के गंभीर आपत्तियों के बावजूद, हक़ीक़त बन गया। कौन से कड़ी इन दोनों भागों को जोड़ती है, सुनिए राहुल के साथ इस चर्चा में। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट' अमेज़न पर एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा(सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा
भारत को आज़ादी मिलने के तीन हफ्ते बाद, ४ सितम्बर १९४७ को, दिल्ली में दंगे शुरू हो गए। शहर के करोल बाग़ इलाके में एक हाई-स्कूल में छात्र परीक्षा दे रहे थे। इसी समय स्कूल में एक भीड़ घुस गई और उसने परीक्षा देते हुए मुसलमान छात्रों का क़त्ल कर दिया। तीन दिनों में दिल्ली के ८,००० से १०,००० मुसलमान निवासी मारे गए। इसके एक महीने बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने शहर के तीन इलाकों के हिन्दुओं को विशेष मुबारकबाद दी − करोल बाग़, सब्ज़ीमंडी, और पहाड़गंज। ये वही इलाके थे जहाँ मुसलामानों को सबसे ज़्यादा क्षति पहुँची थी। सुनिए एक चर्चा गोलवलकर की जीवनी के लेखक धीरेन्द्र झा के साथ, उनकी किताब पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)'गोलवलकर' अमेज़न परधीरेन्द्र झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 43: 'पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया' − जिनी लोकनीता व डीना हीथ
जब अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक निहत्थे अश्वेत व्यक्ति की एक गोरे पुलिसकर्मी ने हत्या कर दी तब इस निर्मम हत्या के विरोध में हज़ारों अमेरिकी नागरिक सड़क पर उतर आये। देखते-देखते 'ब्लैक लाइव्स मैटर' के नाम से ये विरोध पुरे विश्व में फ़ैल गया। वहीं भारतीय पुलिस द्वारा हिंसा का प्रयोग और संदिग्ध अपराधियों को यातना देना, उनकी हत्या कर देना आम है। मगर इस हकीक़त से यहाँ की आवाम को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है। क्या कारण है भारत में व्यापक पुलिस हिंसा का? क्या हल है इसका? ‘पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया’ में विशेषज्ञ अपने लेखों में पुलिसी हिंसा के अलग-अलग पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। किताब का संपादन किया है जिनी लोकनिता और डीना हीथ ने। सुनिए किताब पर एक चर्चा, डॉ जिनी लोकनीता के साथ।इंस्टाग्राम पर जिनी लोकनिताएक्स (ट्विटर) पर जिनी लोकनिता ‘पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया’ अमेज़न पर अब्दुल वाहिद शेख की 'बेगुनाह क़ैदी' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी
आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ ही साथ मिलेगा, परेश नाथ, दिना नाथ मल्होत्रा, और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज प्रकाशक और संपादक के हिंदी भाषा के प्रसार और विकास में योगदान की कहानी। सुनिए डॉ मंधवानी के साथ एक चर्चा उनकी रोचक किताब 'एवरीडे रीडिंग' पर।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर आकृति मंधवानी एक्स (ट्विटर) पर आकृति मंधवानी 'एवरीडे रीडिंग' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे
ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत के आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म के प्रसार को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९५२ में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण की स्थापना की। वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों के बीच हिन्दू धर्म व संस्कृति के प्रचार और समाज सेवा के राह को अपनाया। समय के साथ, वनवासी कल्याण आश्रम ने सत्तारूढ़ ताकतों द्वारा आदिवसीययों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ उठाई। मगर जैसा डॉ कमल नयन चौबे अपनी किताब 'आदिवासी ऑर वनवासी' में दिखलाते हैं, वनवासी कल्याण आश्रम ने कभी भी खुलकर आदिवासियों के हक़ की लड़ाई का समर्थन नहीं किया और न ही इस संघर्ष में उनका साथ दिया। सुनिए किताब पर एक चर्चा डॉ चौबे के साथ।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)फेसबुक पर डॉ कमल नयन चौबे 'परख विथ कमल नयन चौबे' – ‘यु ट्युब’ चैनल'आदिवासी ऑर वनवासी' अमेज़न पर डॉ चौबे की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 40: 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर − द मेनी लाईव्स ऑफ़ अज्ञेय' − अक्षय मुकुल
कई लोगों का मानना है कि प्रेमचंद के 'गोदान' के बाद हिंदी साहित्य का सर्वोच्च उपन्यास है, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की कृति 'शेखर : एक जीवनी'। सच्चिदानंद वात्स्यायन को 'अज्ञेय' उपनाम स्वयं प्रेमचंद ने दिया था और, आगे चल के, फणीश्वर नाथ रेणु ने एक लेख में उनको − 'अलख, अचल, अगम, अगोचर, अजब, अकेला, अज्ञेय' कहा था। अपने जीवन काल में अज्ञेय ने कविताएं, उपन्यास, लघु-कहानियाँ, निबंध, यात्रा-वृतांत, और अख़बार व पत्रिकाओं के लिए अनेक आलेख लिखे। अज्ञेय को हिंदी साहित्य में आधुनिकतावाद यानी 'मॉडर्निज़्म' का जनक माना जाता है। अक्षय मुकुल की लिखी हुई, अज्ञेय की जीवनी का शीर्षक है 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर' यानी, लेखक, बाग़ी, सैनिक, और प्रेमी। ये बहुप्रशंसित जीवनी अज्ञेय के जीवन के हर एक पहलु पर प्रकाश डालती है। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर' अमेज़न पर अक्षय मुकुल की अन्य किताबें अमेज़न परएक्स (ट्विटर) पर अक्षय मुकुल अज्ञेय की अन्य किताबें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 39: 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' − रक्षंदा जलील
क़रीब एक हज़ार साल से, दिल्ली हिन्द-उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों पर शासन करने वाले अलग-अलग साम्राज्यों की राजधानी रही है। रक्षंदा जलील अपने आप को पक्की दिल्ली-वाली मानती हैं और वे संपादक हैं 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' की। इस किताब में ३२ कहानियाँ हैं – जो, या तो लघु कथाएँ हैं या उपन्यास का अंश हैं। इन कहानियाँ को पढ़ के हम वाक़िफ़ होते हैं सन 1857 से लेकर आज तक की दिल्ली के अच्छे-बुरे, मीठे-वीभत्स पहलुओं से।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), और फेसबुक पर डॉ रक्षंदा जलील'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' अमेज़न परएपिसोड 12: 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' − रक्षंदा जलील'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' अमेज़न पर रक्षंदा जलील द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 38: 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' − अनुमेहा यादव
आज़ादी के बाद, १९५० और १९६० के दशकों में, भारत को अपनी आबादी को भुखमरी से बचाने के लिए अक्सर अमरीकी अनाज पर निर्भर होना पड़ता था। फिर 'हरित क्रांति' यानी 'ग्रीन रेवोलुशन' के बदौलत, वर्ष १९७१ तक भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया। ये संभव हुआ, नए किस्म के उपजाऊ अनाज, सिंचाई व्यवस्था में बढ़ोत्तरी, और रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाइयों के व्यापक इस्तेमाल से। लेकिन आत्मानिर्भरता के लिए देश को कीमत अदा करनी पड़ी। क्या असर हुआ है नई खेती प्रणाली का छोटानागपुर प्रान्त के आदिवासी गाँवों में? चित्रों समेत, एक सरल कहानी द्वारा इसका वर्णन किया है अनुमेहा यादव ने अपनी पुस्तक 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' में, जो बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए लिखी गयी है।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)एक्स (ट्विटर) पर अनुमेहा यादव वर्डप्रेस पर अनुमेहा के ब्लॉग 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' अमेज़न परछोटानागपुर क्षेत्र में धान के देसी बीजों के पुनः प्रयोग पर 'द वायर' में अनुमेहा का आलेख कृषि वैज्ञानिक डॉ अनुपम पॉल के साथ धानके बीजों के संरक्षण पर 'द वायर' में अनुमेहा का इंटरव्यू 'प्लास्टिक' 'फोर्टीफाईड' चावल का आदिवासी क्षेत्रों में वितरण पर 'द वायर' में अनुमेहा की फिल्म कृत्रिम चावल के राशन द्वारा वितरण पर 'द हिन्दू' के साथ अनुमेहा का पॉडकास्ट (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 37: 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' − संघमित्रा चक्रवर्ती
फिल्म जगत की एक मशहूर 'एक्टर-डायरेक्टर' जोड़ी थी, सत्यजीत रे और शौमित्रो चटर्जी की। शौमित्रो ने रे की २८ फिल्मों में से १४ में मुख्य किरदार निभाया। इन १४ फिल्मों के अलावा शौमित्रो ने और भी बहुत कुछ किया। अपने ६० साल के करियर में उन्होंने पुरे ३०० फिल्मों में काम किया। साथ-साथ, वे एक 'थिएटर-एक्टर', नाटककार, लेखक, कवि, संपादक, और चित्रकार भी थे। जनवरी 2020 में शौमित्रो ८५ साल के हो गये और उस साल उनकी सात फिल्में रिलीज़ हुई थीं। उसी वर्ष, शौमित्रो का देहांत हो गया। उनकी जीवनी 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' में संघमित्रा चक्रवर्ती लिखती हैं कि सत्यजीत रे के गुज़र जाने के बाद बंगाल के पास सिर्फ शौमित्रो ही बचे थे। सुनिए संघमित्रा के साथ उनके इस कथन और शौमित्रो चटर्जी के जीवन के अन्य पहलुओं पर एक चर्चा। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर संघमित्रा चक्रवर्ती एक्स (ट्विटर) पर संघमित्रा चक्रवर्ती फेसबुक पर संघमित्रा चक्रवर्ती 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' अमेज़न पर संघमित्रा चक्रवर्ती का अपना वेबसाइट (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 36: 'अपरूटेड' − ईता मेहरोत्रा
विश्व भर में विकास के नाम पर जंगल काट कर ख़त्म किये जा रहे हैं। ऐसे में, अगर सरकार जंगल के एक टुकड़े को नेशनल पार्क घोषित कर देती है और वहाँ आदमी के निवास व आवाजाही को वर्जित कर देती है, तो इस को अच्छा ही माना जायेगा। मगर सदियों से इन्ही जंगलों का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इनमे वास करने वाले आदिवासी। अगर वन संरक्षण के नाम पर उनको किसी नेशनल पार्क से जबरन निकाल दिया जाय, तो क्या ये उचित होगा? आज, उत्तराखंड की वन-गूजर जनजाति इसी विडम्बना का शिकार है। ईता मेहरोत्रा अपनी ग्राफ़िक या चित्रपट शैली में बनाई गई पुस्तक 'अपरूटेड' में वन गुज़रों की व्यथा और उनकी परिस्थितियों की दृढ़ता से सामना करने की क्षमता -- दोनों पर प्रकाश डालती हैं। सुनिए ईता के साथ एक चर्चा उनकी संवेदनशील पुस्तक पर।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर ईता मेहरोत्रा 'अपरूटेड' अमेज़न पर'शाहीन बाघ' अमेज़न परएपिसोड 13: ‘स्टार्री स्टार्री नाईट’ – नंदिता बासु(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 35: 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' − प्रेम शंकर झा
प्रेम शंकर झा की नई किताब का नाम है − 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी'; हिंदी में कहें तो, 'भारतीय लोकतंत्र का विध्वंस'। झा को पत्रकारिता करते हुए पचास से ज़्यादा साल हो चुके हैं और वे देश के प्रतिष्ठित अखबारों में संपादक रह चुके हैं। उनका मानना है कि आज भारत में लोकतंत्र अपने अंतिम चरण पर है। इसके चारों स्तम्भ − कार्यपालिका (एक्सीक्यूटिव), विधान मंडल (लेजिस्लेचर), न्यायपालिका, और प्रेस या मीडिया − खोखले हो चुके हैं। क़िताब में झा बताते हैं कि किन कारणों से भारत की राजनीति और भारतीय समाज, दक्षिणपंथी राजनीति के चपेट में आ गए हैं। यानी, किन कारणों से भारत में हिंदुत्व की राजनीति का प्रभाव इतना बढ़ गया है। और, क्यों इस राजनीती से देश में लोकतंत्र और देश की अखंडता − दोनों को गंभीर खतरा है।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)फेसबुक पर प्रेम शंकर झा 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' अमेज़न पर प्रेम शंकर झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 34: 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' − अशोक वाजपेयी
आज़ाद भारत के महान चित्रकार सय्यद हैदर रज़ा ने अपने लम्बे जीवन के ६० वर्ष फ्रांस में गुज़ारे, मगर उनकी कला का मुख्य प्रेरणा स्रोत भारत की संस्कृति रही। इस प्रेरणा का सबसे जाना-माना प्रतीक है 'बिंदु', वो काले या अन्य रंग का गोल घेरा जो रज़ा साहब के चित्रों में हमारी नज़र को अपनी ओर खींचता है। अपनी पुस्तक 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' में अशोक वाजपेयी लिखते हैं, कि बिंदु − एक उत्पत्ति का बिंदु और एक अंत का बिंदु है; एक अधयात्मिक अवधारणा है और सौंदर्यशास्त्र से जुड़ी कृति है; एक स्थिर केंद्र और ऊर्जा का एक स्रोत है; एक मौन की बिंदु और स्फूर्त गति की शरुआत है; एकीकरण और ध्यान का केंद्र है; विकिरण की बिंदु है; और अंकुरण व प्रकाश की बिंदु है। सुनिए रज़ा और उनकी कला पर एक चर्चा अशोक वाजपेयी के साथ।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)फेसबुक पर रज़ा फाउंडेशन फेसबुक पर रज़ा न्यास इंस्टाग्राम पर रज़ा फाउंडेशन 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' अमेज़न पर अशोक वाजपेयी की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 33: 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' — हिलाल अहमद
जुलाई २०२३ में रेलवे पुलिस के एक सिपाही ने जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सफर करते तीन मुसलमान यात्रियों की गोली मारकर हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे मुसलमान थे। अपनी किताब में डॉ हिलाल अहमद लिखते हैं कि इस घटना से पता चलता है कि आज के भारत में हिंसात्मक मुस्लिम-विरोधी माहौल किस हद तक बढ़ चुका है। मगर उन्होंने पिछले दस वर्षों में भारत के मुसलमान नागरिकों के हालात और उनके मुस्लिम पहचान का आकलन सहनशील, निष्पक्ष, और शांतचित्त भाव से किया है। सुनिए एक चर्चा डॉ अहमद के साथ उनकी पुस्तक 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)एक्स (ट्विटर) पर हिलाल अहमद फेसबुक पर हिलाल अहमद 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' अमेज़न पर हिलाल अहमद की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 32: 'अ ड्रॉप इन द ओशन' − सईदा सईदैन हमीद
पड़ोस के बच्चों ने सात साल की सईदा सईदैन के साथ खेलने से इंकार कर दिया क्योंकि वो मुसलमान थी। नन्ही सईदा ने इस घटना पर एक कहानी लिखी जो बहुत सराही गयी और एक किताब के रूप में छपी। किताब खूब चली और सईदा को तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित नेहरू के हाथों एक गुड़िया पुरूस्कार में मिली। आगे चल के डॉ सईदा हमीद ने पढ़ा-लिखा, घर बसाया, और घर के बाहर भी बहुत कुछ हासिल किया। वे योजना आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं, और उन्होंने एक कुशल लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, व शिक्षा-क्षेत्र में कार्यकर्ता के रूप में अपना स्थान बनाया। कितना आसान और कितना मुश्किल है भारत में एक मुसलमान होना − इसका अंदाज़ लगता है डॉ हमीद के संस्मरण 'अ ड्राप इन द ओशन' को पढ़ के।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर सईदा हमीद फेसबुक पर सईदा हमीद इंस्टाग्राम पर मुस्लिम विमेंस फोरम फेसबुक पर मुस्लिम विमेंस फोरमइंस्टाग्राम पर ख्वाजा अहमद अब्बास मेमोरियल ट्रस्ट फेसबुक पर ख्वाजा अहमद अब्बास मेमोरियल ट्रस्ट'अ ड्राप इन द ओशन' अमेज़न पर सईदा हमीद की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 31: 'द ग्रेट निकोबार बिट्रेयल' − पंकज सेखसरिया
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप 'द ग्रेट निकोबार' करीब-करीब पूरी तरह से घने जंगल से ढका हुआ है और आधुनिक सभ्यता से लगभग अछूता है। शोम्पेन और 'ग्रेट निकोबारी' आदिवासी समुदाय इस छोटे से द्वीप में सैकड़ों हज़ारों वर्षों से रह रहे हैं। यहाँ अनेकों दुर्लभ पशु-पक्षि, मछलियाँ, व अन्य प्राणी-प्रजातियां पाई जाती हैं। अब भारत सरकार 'द ग्रेट निकोबार' द्वीप में एक विशाल 'ट्रांसशिपमेंट कंटेनर पोर्ट' यानी बंदरगाह का निर्माण करने जा रही है। साथ ही साथ, एक नए शहर, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, और पावर प्लांट का भी निर्माण होगा। ये सब करने के लिए १० लाख पेड़ों को काटा जाएगा। परियोजना की लागत होगी, ८०,००० करोड़ रुपये। सुनिए एक चर्चा 'द ग्रेट निकोबार बिट्रेयल' के संपादक डॉ पंकज सेखसरिया के साथ जिसमें वे बताते हैं कि ये परियोजना विनाश का पर्याय है, विकास का नहीं।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर पंकज सेखसरिया एक्स (ट्विटर) पर पंकज सेखसरिया फेसबुक पर पंकज सेखसरिया लिंक्ड इन पर पंकज सेखसरिया 'द ग्रेट निकोबार बिट्रेयल' अमेज़न पर 'सिविल सोसाइटी' पत्रिका में 'द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' पर आलेख 'सिविल सोसाइटी' पत्रिका में एडमिरल अरुन प्रकाश का इंटरव्यू (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 30: 'एच-पॉप' − कुनाल पुरोहित
कुनाल पुरोहित की किताब में तीन किरदार हैं − गायिका कवि सिंह, लेखक व राजनैतिक ‘कमेंटेटर’ संदीप देओ, और कवि कमल अग्नेय। तीनों के कला और हुनर का, आजीविका और पेशे का, केंद्र है हिंदुत्व की विचारधारा; और तीनों अपने श्रोताओं तक पहुँचने के लिए निर्भर हैं इंटरनेट व 'ऑनलाइन' जगत पर। क़िताब में, कुनाल इनके सोच, परिवेश, काम-काज, और जीवन के उतराव-चढ़ाव को उजागर करते हैं। और इस तरह, 'एच-पॉप − द सेक्रेटिव वर्ल्ड ऑफ़ हिंदुत्वा पॉप स्टार्स' हमारे समय का एक आइना बन जाता है।इंस्टाग्राम पर कुनाल पुरोहितएक्स (ट्विटर) पर कुनाल पुरोहितफेसबुक पर कुनाल पुरोहितलिंक्ड इन पर कुनाल पुरोहित'एच-पॉप' अमेज़न पर बद्री नारायण कृत 'रिपब्लिक ऑफ़ हिंदुत्वा' अमेज़न पर(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 29: 'नालंदा − हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड' − अभय कुमार
नालंदा महाविहार का इतिहास शुरू होता है सम्राट अशोक के समय से, यानी ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से, और खत्म होता है — 1,500 साल बाद —बारहवीं शताब्दी में। 'नालंदा' किताब के लेखक अभय कुमार बताते हैं कि अपने समय में नालंदा ज्ञान का एक विश्वविख्यात केंद्र था जहाँ चीन, तिब्बत, कोरिया और जापान जैसे दूर-दराज़ देशों से लोग पढ़ने आते थे। मगर आज नालंदा एक रहस्य है। क्या है नालंदा का महत्व? क्यों आज की वैश्विक आधुनिक सभ्यता नालंदा की ऋणी है? क्या बख्तियार खिल्जी ने वाकई नालंदा का विध्वंस किया था? सुनिए एक चर्चा अभय कुमार के साथ उनकी किताब ‘नालंदा’ पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर अभय कुमार एक्स (ट्विटर) पर अभय कुमार 'नालंदा' अमेज़न परअभय द्वारा लिखी गई अन्य पुस्तकें अमेज़न पर(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 28: 'द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स' − नेहा दीक्षित
नेहा दीक्षित की किताब 'द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स' कहानी है सईदा की, जो बनारस के दंगो में सब कुछ खोने के बाद, आजीविका की तलाश में अपने पति और छोटे बच्चों के साथ १९९६ में दिल्ली आ जाती है। अगले २४ सालों में सईदा दिल्ली में ५० अलग-अलग तरह के काम करती है, जैसे साइकिल के पुर्जे बनाना, बादाम छीलना, डॉक्टर के क्लीनिक में सफाई करना, या गजक, खिलौने और अगरबत्ती बनाना। दिन में १६ से १८ घंटों काम करने के बावजूद सईदा रोटी, कपड़े, और मकान के लिए हमेशा झुझती रहती है। वर्ष २०२० में दिल्ली में दंगे होते हैं और एक बार फिर सईदा का सब कुछ लुट जाता है। सुनिए 'द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स' पर एक चर्चा, नेहा के साथ।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देखसकते हैं।)इंस्टाग्राम पर नेहा दीक्षित एक्स (ट्विटर) पर नेहा दीक्षित फेसबुक पर नेहा दीक्षित नेहा दीक्षित का वेबसाइट अमेज़न पर 'द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स'(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 27: 'स्टिल, लाइफ़' − ईशान तन्खा
सितम्बर २०१९ में शुरु हुआ एक घटनाक्रम, जिसकी चार मुख्य कड़ियाँ थीं।पहली कड़ी थी दिल्ली के शाहीन बाग़ इलाके में सी.ए.ए.−एन.आर.सी. कानूनों का विरोध-प्रदर्शन, जो यहाँ से देश के अन्य भागों में फैला। इसके बाद फ़रवरी २०२१ में दिल्ली में दंगे हुए और इन दंगों के तुरंत बाद पुरे देश में कोविड महामारी का लॉक-डाउन लगा। घटनाक्रम की आखिरी कड़ी थी किसान आंदोलन, जिसके केंद्र थे दिल्ली के बॉर्डर इलाके। ऐसा लगने लगा कि ज़िन्दगी में कुछ बुनियादी बदलाव आ गया है। यही अहसास ताज़ा कर देती हैं फोटो जर्नलिस्ट ईशान तन्खा की तसवीरें, जो उन्होंने तीन पतली पत्रिकाओं में संकलित कर के 'स्टिल, लाइफ' के नाम से छापा है। सुनिए 'स्टिल, लाइफ' पर एक चर्चा, ईशान तन्खा के साथ।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देखसकते हैं।)इंस्टाग्राम पर ईशान तन्खा एक्स (ट्विटर) पर ईशान तन्खा फेसबुक पर ईशान तन्खा ईशान तन्खा का वेबसाइट 'स्टिल, लाइफ' की प्रति ख़रीदने का लिंक (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 26: 'सो सेज़ जन गोपाल' — पुरुषोत्तम अग्रवाल
विश्वास नहीं होता कि आज से पाँच सौ साल पहले, कबीर व अन्य भक्ति काल के कवियों ने, ख़ास कर वे जो निर्गुण मार्गी थे, जाति प्रथा व अन्य सामाजिक कुरीतियों, और खोखले कर्मकाण्ड की कितनी तीखी आलोचना की थी। ये बातें उभर के आती हैं डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल की नवीनतम पुस्तक में, जिसका विषय है भक्ति काल के कवि, जन गोपाल। जन गोपाल, सोलहवीं और सत्रवीं शताब्दी के एक राजस्थानी कवि और लेखक थे, जो बृज भाषा में लिखते थे। आज वे अपने गुरु दादू दयाल की जीवनी, 'दादू जन्म लीला' के लेखक होने के नाम से जाने जाते हैं। आइये सुनते हैं एक चर्चा डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल के साथ उनकी किताब 'सो सेज़ जन गोपाल' पर। इंस्टाग्राम पर पुरुषोत्तम अग्रवाल एक्स (ट्विटर) पर पुरुषोत्तम अग्रवाल फेसबुक पर पुरुषोत्तम अग्रवाल 'सो सेज़ जन गोपाल' अमेज़न पर पुरुषोत्तम अग्रवाल की अन्य किताबें अमेज़न पर एपिसोड 14 : ‘सिटी ऑन फायर - अ बॉयहुड इन अलीगढ़’ – ज़ेयाद मसरूर खान (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 25: 'बिफोर आई फॉरगेट' – एम. के. रैना
ज़िन्दगी में उतराव-चढ़ाव को एक ही सिक्के के दो पहलु मानते हुए, प्रेम, सौहार्द, व भाईचारे के भावना को प्रधानता देते हुए, कार्यरत रहना चाहिए। ये बात समझ में आती है, भारत के थिएटर जगत और फिल्म जगत से जुड़े हुए जाने-माने हस्ती, एम. के. रैना के संस्मरण 'बिफोर आई फॉरगेट' को पढ़ के — चाहे वो आतंक के साये में घिरे, कर्फ्यू-ग्रस्त श्रीनगर में अपनी माँ की अंतिम क्रिया कर रहे हों; दिल्ली के १९८४ के दंगों में राहत कार्य में जुटे हों; बाबरी-मस्जिद-विध्वंस के बाद अयोध्या में शास्त्रीय संगीत समारोह आयोजित कर रहे हों; या आतंकवाद से ग्रस्त कश्मीर घाटी में भांड-पाथेर नाट्य शैली के पुनर्जागरण में जुटे हों। आइये सुनते हैं एक चर्चा एम. के. रैना के साथ उनकी पुस्तक 'बिफोर आई फॉरगेट' पर। 1. 'बिफोर आई फॉरगेट' अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 24: ‘सर्कल्स ऑफ़ फ्रीडम’ – टी. सी. ए. राघवन
आज हम गाँधी, नेहरू, सरदार पटेल, और भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता संग्राम के बड़े नेताओं और क्रांतिकारिओं के जीवन से वाकिफ तो हैं, मगर आसफ अली जैसे स्वतंत्रता सैनानि व नेताओं के जीवन का ज्ञान हमको प्रायः नहीं के बराबर होता है। दिल्ली में, भले ही हम आसफ़ अली रोड, अरुना आसफ अली रोड, अंसारी रोड, मौलाना मोहम्मद अली मार्ग जैसे सडकों पर चलते हों, मगर कौन थे ये लोग जिनके यादगार में इन सड़कों का नाम रखा गया है, क्या भूमिका थी इनकी स्वतंत्रता संग्राम में, कैसी थी इनकी ज़िन्दगी, क्या कुर्बानियां दी इन्होंने – ये सब उजागर किया है टी. सी. ए. राघवन ने अपनी किताब 'सर्कल्स ऑफ़ फ्रीडम' में। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 1. फेसबुक पर टी. सी. ए. राघवन 2. एक्स (ट्विटर) पर टी. सी. ए. राघवन 3. 'सर्कल्स ऑफ़ फ्रीडम' अमेज़न पर 4. टी. सी. ए. राघवन की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 23: 'आइकोनिक ट्रीज़ ऑफ़ इंडिया' — एस. नटेश
शहंशाह शाहजहाँ, टीपू सुल्तान, और मराठा साम्राज्य के आखरी पेशवा, बाजी राओ द्वितीय – इन्होंने कौन से पेड़ लगाए थे, जो आज भी जीवित हैं? भारत में कहाँ है दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ जिसके नीचे एक बार में २०,००० आदमी खड़े हो सकते हैं? कहाँ है भारत का सबसे पुराना वृक्ष, जिसकी उम्र है २०२३ साल? किस पेड़ के नीचे गुरु नानक बैठे थे, और किसके नीचे रबिन्द्रनाथ टैगोर बैठे? किस पेड़ को महात्मा गाँधी ने लगाया था और किसको विश्व विख्यात एक्स्प्लोरर डेविड लिविंगस्टोन ने? इनमे से कुछ सवालों के जवाब आपको मिलेंगे डॉ एस. नटेश के साथ इस चर्चा में, और शेष सवालों के जवाब मिलेंगे उनकी किताब, 'आइकोनिक ट्रीज ऑफ़ इंडिया', यानी ‘भारत के बहुत खास पेड़’, में। 1. इंस्टाग्राम पर 'आइकोनिक ट्रीज ऑफ़ इंडिया' 2. अमेज़न पर 'आइकोनिक ट्रीज ऑफ़ इंडिया' (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 22: 'राष्ट्र और नैतिकता − नए भारत से उठते 100 सवाल' − राजीव भार्गव
दिल्ली के रिंग-रोड सड़क पर जब राजीव भार्गव की गाड़ी एक अन्य गाड़ी से टकराते-टकराते बची, तो अपनी गाड़ी से उतरकर उन्होंने दूसरी गाड़ी के ड्राइवर से पूछा, 'क्या आपको मालूम है कि साइड रोड पर चलती गाड़ी को मेन रोड पर आती हुई गाड़ी के लिए रुकना होता है?' दुसरे ड्राइवर ने जवाब दिया, ‘जो गाड़ी जिस रोड पर होती है, उसके लिए वही मेन रोड होता है।' ऐसे ही व्यक्तिगत अनुभव, एवं देश और समाज की खबरें, इतिहास से लिए गए उदाहरण, और गाँधी व नेहरू जैसे हस्तियों के सोच के जरिये से डॉ भार्गव समकालीन भारत के नैतिक स्वास्थ का आकलन करते हैं, अपनी किताब 'राष्ट्र और नैतिकता' में। किताब में, जहाँ-जहाँ डॉ भार्गव को अंधेरा दिखता है, वहाँ से उजियारे की ओर जाने का रास्ता भी दिखाते हैं। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) फेसबुक पर राजीव भार्गव इंस्टग्राम पर राजीव भार्गव एक्स (ट्विटर) पर राजीव भार्गव ‘बिटवीन होप एंड डिस्पेयर’ अमेज़न पर 'राष्ट्र और नैतिकता' अमेज़न पर राजीव भार्गव की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर एपिसोड 4: जॉर्ज ओरवेल की कालजयी उपन्यास '1984' पर एक चर्चा अभिषेक श्रीवास्तव के साथ एपिसोड 21: राधा कुमार के साथ एक चर्चा उनकी पुस्तक 'द रिपब्लिक रीलर्न्ट' पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 21: 'द रिपब्लिक रीलर्न्ट − रीन्यूइंग इंडियन डेमोक्रेसी − 1947 टू 2024' − राधा कुमार
अपनी किताब में राधा कुमार कहती हैं कि भारत में पहले गणराज्य की स्थापना हुई थी १९४७ में, जब देश को आज़ादी मिली। वे ये भी कहती हैं कि २०१९ में − जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोबारा एन. डी. ए. (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) की सरकार सत्ता में आई − तब भारत में 'सेकंड रिपब्लिक', यानी दूसरे गणराज्य की स्थापाना हो गई। वो इसलिए, क्योंकि इस प्रशासन के लक्ष्य, और उन लक्ष्यों को हासिल करने के तरीकों, का भारत के संविधान से वास्ता कम था। ये एक गंभीर आरोप है। राधा कुमार क्यों और किन तथ्यों के आधार पर ऐसा मानती हैं, ये जानने के लिए आप पढ़ सकते हैं उनकी पुस्तक 'द रिपब्लिक रीलर्न्ट − रीन्यूइंग इंडियन डेमोक्रेसी − 1947 टू 2024'। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) एक्स (ट्विटर) पर राधा कुमार 'द रिपब्लिक रीलर्न्ट’ अमेज़न पर राधा कुमार की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 20: 'द पावर प्लांट − फ़्रैगमेन्ट्स इन टाइम' − रवि अगरवाल
दिल्ली में महात्मा गाँधी की समाधी 'राजघाट' के निकट यमुना नदी के तट से सटा एक पावर प्लांट हुआ करता था जिसका उद्घटान पंडित जवाहरलाल नेहरू ने १९६३ में किया था। पचास साल से ऊपर देश की राजधानी को बिजली प्रदान करने के बाद इस बिजली घर को बंद कर दिया गया। कारण था, शहर में प्रदुषण का प्रकोप, जिसमे योगदान था इसके चिमनियों से निकलते कोयले के धुंए का। रवि अगरवाल तेरह साल की उम्र में ही, हाथ में कैमरा लिए, इस बिजली घर के इर्द-गिर्द घूम चुके थे। इसके बंद होने के कुछ समय बाद रवि − अब एक जानेमाने पर्यावरण कार्यकर्ता और कलाकार की हैसियत से − कैमरों से लैस, इस वीरान कारखाने के अंदर अकेले गए और वहाँ चार दिनों के अंदर कई तस्वीरें उतारी। उन तस्वीरों का संकलन है, उनकी 'फोटो बुक', यानी तस्वीरों की किताब, 'द पावर प्लांट − फ़्रैगमेन्ट्स इन टाइम'। आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं। 1. फेसबुक पर रवि अगरवाल 2. इंस्टग्राम पर रवि अगरवाल 3. रवि अगरवाल का वेबसाइट 4. 'द पावर प्लांट -- फ़्रैगमेन्ट्स इन टाइम', रवि अगरवाल की वेबसाइट पर 5. रवि द्वारा लिखी गई अन्य पुस्तकें व लेख रवि अगरवाल की वेबसाइट पर 6. 'दिल्ली रिज' के बचाव पर रवि का लेख 7. गांधीजी और 'क्लाइमेट चेंज' पर रवि का लेख (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 19: 'द कलर्स ऑफ़ नैशनलिज़्म' − नंदिता हक्सर
नंदिता हक्सर का जन्म नए-नए आज़ाद भारत के एक कुलीन परिवार में हुआ। उनके पिता आला सरकारी अफसर थे और नेहरू परिवार से उनके करीबी रिश्ते थे। मगर, कम उम्र से ही सत्ता से दूरी रखते हुए, नंदिता ने वक़ालत की पढ़ाई की और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता बन गईं। आज़ादी के सात साल बाद जन्मी नंदिता के सपनों का भारत, सदैव पंडित नेहरू के समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष आदर्शों का भारत रहा है। इन आदर्शों से प्रेरित हो, वे मानवाधिकार-हनन से पीड़ित भारतियों को न्याय दिलाने के काम में जुट गईं − चाहे वो हिंसा के साये में रहते भयभीत अल्पसंख्यक हों, सैनिक-शासन जैसे हालात के चपेट में आए पूर्वोत्तर के नागा निवासी हों, या गरीबी और भुखमरी से ग्रस्त आदिवासी हों। नंदिता हक्सर के इस लम्बे सफर की दास्ताँ है उनका संस्मरण, 'द कलर्स ऑफ़ नैशनलिज़्म' यानी 'राष्ट्रवाद के रंग। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 1. 'द कलर्स ऑफ़ नैशनलिज़्म' अमेज़न पर 2. 'द फ्लेवर्स ऑफ़ नैशनलिज़्म' अमेज़न पर 3. 'फ्रेम्ड ऐज़ अ टेररिस्ट' अमेज़न पर 4. नंदिता हक्सर की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 18: 'कास्ट प्राइड − बैटल्स फॉर इक्वालिटी इन हिन्दू इंडिया' − मनोज मित्ता
११ जून १९९७ को मुंबई के घाटकोपर इलाके के रमाबाई नगर नाम के बस्ती में, पुलिस ने १० दलितों की गोली मर के हत्या कर दी। बस्ती में बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति को किसी ने चप्पल की माला पहना दी थी और वहाँ के दलित निवासी इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं, १५ जून २००२ को, हरयाणा में दुलीना नाम के कस्बे में 'गोरक्षक' पाँच घायल दलितों को पुलिस चौकी में लाते हैं और गोहत्या के 'जुर्म' में उनको पीट-पीट कर मार देते हैं। पुलिस-कर्मी तमाशा देखते रहते हैं। क्यों था पुलिस का रवैया इतना फ़र्क, इन दोनो वाकयों में? जवाब आपको मिलेगा, मनोज मित्ता की किताब 'कास्ट प्राइड − बैटल्स फॉर इक्वालिटी इन हिन्दू इंडिया' में। पिछले २०० सालों में, हिंदुस्तान में जाति-प्रथा और समाज में उसके प्रभाव को ले के बने क़ानूनों की कहानी है 'कास्ट प्राइड'। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 1. 'कास्ट प्राइड' अमेज़न पर 2. मनोज मित्ता की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 17: 'बीइंग हिन्दू, बीइंग इंडियन' − वन्या वैदेही भार्गव
अंग्रेजी हुकूमत के पुलिस के डंडों के निर्मम प्रहार ने लाला लाजपत राय की जान ले ली। इसका बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु ने अंग्रेजी पुलिस अफसर जे. पी. सॉन्डर्स की गोली मार के हत्या कर दी, और फांसी पर चढ़ के देश के लिए शहीद हो गए। आज, लाला लाजपत राय की स्मृति शायद भगत सिंह के स्मृति के साये में रह गयी है। मगर लाजपत राय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, राज नेता, विचारक, और लेखक थे। वे आज़ाद भारत के निर्माताओं में से एक थे। हिन्दू समाज के सशक्तिकरण की बात करने वाले लाजपत राय, एक कट्टर 'सेक्युलर' यानी धर्मनिरपेक्ष थे। ये बातें बड़ी स्पष्टता से उजागर होती हैं, वन्या वैदेही भार्गव की किताब 'बीइंग हिन्दू, बीइंग इंडियन' में — जो लाजपत राय के उभरते और बदलते सोच, विचारों और सिद्धांतों की जीवनी है। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 1. इंस्टाग्राम पर वन्या वैदेही भार्गव 2. एक्स (ट्विटर) पर वन्या वैदेही भार्गव 3. फेसबुक पर वन्या वैदेही भार्गव 4. 'बीइंग हिन्दू, बीइंग इंडियन' अमेज़न पर 5. द कलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ लाला लाजपत राय अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 16: 'द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जॉर्ज फर्नांडेस' — राहुल रामगुंडम
जॉर्ज फर्नांडेस की छवि है, एक निर्भीक, प्रखर, बेबाक नेता की जिसने अपना राजनितिक सफर आरम्भ किया मात्र १९ वर्ष की उम्र में, समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित हो, कामगारों के हक़ की लड़ाई लड़ते हुए। और, साठ वर्ष पश्चात, उस सफर का अंत किया उन हिन्दूवादी राजनितिक ताकतों से पूरी तरह जुड़े हुए, जो भारत के राजनैतिक नक़्शे पर छाये हुए थे। एक अति-साधारण युवा जिसने सत्ता को निर्भीकता से ललकारा और उससे लोहा लिया, और एक वरिष्ठ राजनेता जो कई वर्षों तक स्वयं सत्ताधारी रहा — इन दो चरणों और उनके बीच की कहानी आपको मिलेगी, राहुल रामगुंडम की किताब 'द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जॉर्ज फर्नांडेस' में। आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं। 1. ट्विटर पर राहुल रामगुंडम 2. 'द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जॉर्ज फर्नांडेस' अमेज़न पर 3. राहुल रामगुंडम द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर 4. 'द मेनी शेड्स ऑफ़ जॉर्ज फर्नांडेस' — 'द सीन एंड द अनसीन' पॉडकास्ट पर एक चर्चा 5. 'फ्रीडम ऐट मिडनाईट' — लेखक लैरी कॉलिंस व डॉमिनिक ला पीयेर — अमेज़न पर 6. 'इज़ पैरिस बर्निंग' — लेखक लैरी कॉलिंस व डॉमिनिक ला पीयेर — अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 15: 'द डायरी ऑफ़ गुल मोहम्मद' – हुमरा कुरैशी
चौदह-वर्षीय गुल मुहम्मद अपने माँ-बाप, दादी, और भाई गुलज़ार के साथ स्रीनगर में रहता है। साल २०१६ है, और हालात ठीक नहीं हैं। पिता का शॉल बेचने का काम है, मगर शॉल खरीदने वाले ग्राहक बचे ही नहीं हैं। फिर, गुल मुहम्मद के भाई गुलज़ार की एक आँख में सुरक्षा-कर्मियों के बन्दूक से दागे छर्रे लगते हैं और उस आँख की रौशनी ख़त्म हो जाती है। बिगड़ते हालात और आर्थिक तंगी से परेशान, गुल मुहम्मद के घर वाले उसको दिल्ली के एक मदरसे में भेज देते हैं, जहाँ से शुरू होता है उसके एक शहर से दुसरे कस्बे भटकने का सिलसिला, जिसका कोई अंत नहीं दिखता है। अगस्त २०१६ से सितम्बर २०१७ के बीच घटी अपनी आप-बीती का विवरण गुल मोहम्मद एक डायरी में लिखता जाता है। यही डायरी है, वरिष्ठ लेखक हुमरा कुरैशी का उपन्यास, 'द डायरी ऑफ़ गुल मोहम्मद'। आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं। 1. इंस्टाग्राम पर हुमरा क़ुरैशी 2. 'द डायरी ऑफ़ गुल मोहम्मद' अमेज़न पर 3. हुमरा क़ुरैशी द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर 4. 'काशीर — बींग अ हिस्ट्री ऑफ़ कश्मीर फ्रॉम द अरलिएस्ट टाइम्स टू आवर ओन' अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 14: 'सिटी ऑन फायर – अ बॉयहुड इन अलीगढ़' – ज़ेयाद मसरूर खान
ज़ेयाद मसरूर खान की किताब 'सिटी ऑन फायर--अ बॉयहुड इन अलीगढ़' उनके अलीगढ़ के पुराने इलाके, ऊपर कोट, में पलने-बढ़ने की कहानी है। उत्तर प्रदेश के शहर अलीगढ़ के इस कोने में, हिन्दू और मुसलमान एक दुसरे के अगल-बगल पुराने समय से रह रहे हैं। और शायद, हमको ये सुनके बहुत आश्चर्य नहीं होगा कि हिन्दू-मुस्लिम दंगे भी यहाँ समय-समय पर होते रहे हैं। इसी सांप्रदायिक तनाव—जो जब-तब जानलेवा हिंसा का रूप ले लेता था—के बीच में बीते बचपन, किशोरावस्था, और जवानी के पहले-पहले सालों का ज्वलंत और जीवंत विवरण है 'सिटी ऑन फायर'। आप शो-नोट्स sambandh-kakeki.com पर भी देख सकते हैं। 1. एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर ज़ेयाद खान 2. अमेज़न पर 'सिटी ऑन फायर–अ बॉयहुड इन अलीगढ़' 3. अमेज़न पर पॉल ब्रास की किताबें ‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।
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एपिसोड 13: 'स्टार्री स्टार्री नाईट' – नंदिता बासु
अपनी माँ के देहांत के बाद, कुनाल पहाड़ों में स्थित बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने आता है, और वहाँ पहले कुछ महीने अपनी 'आंटी' तारा के साथ ठहरता है। तारा उसी स्कूल में म्यूज़िक टीचर है और वो खुद अभी तक अपनी प्रिय सखी, नीसा, के मौत से उबरी नहीं है। अपने प्रियजनों की मृत्यु से शोकागुल दो लोगों की कहानी है, लेखक नंदिता बासु की कृति, 'स्टार्री स्टार्री नाईट', यानि 'तारों से जगमगाती रात'। ये उपन्यास एक 'ग्राफ़िक नॉवेल' है, अर्थात चित्र-कथा या कॉमिक-बुक शैली में लिखी गई है। टीवी और वीडियो गेम्स या ऑनलाइन गेमिंग के ज़माने से पहले बच्चे कॉमिक्स पढ़ते थे। फिर वही बच्चे बड़े हो गए और उन्होंने कॉमिक्स की शैली में वयस्कों के लिए किताबें लिखनी और पढ़नी शुरू कर दी। कॉमिक्स को अब 'ग्राफ़िक नावेल' कहा जाने लगा। आइये थोड़ी बात करते हैं नंदिता बासु के साथ 'स्टार्री स्टार्री नाईट' पर। आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं। 1. इंस्टाग्राम पर नंदिता बासु 2. 'स्टार्री स्टार्री नाईट' अमेज़न पर 3. नंदिता बासु द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर 4. सारनाथ बनर्जी की पुस्तकें अमेज़न पर 5. 'डेल्ही काम', लेखक विश्वज्योति घोष (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 11: 'नार्थ-ईस्ट इंडिया – अ पोलिटिकल हिस्ट्री' – सम्राट चौधरी
जब १९८० के दशक में सम्राट चौधरी मेघालय की राजधानी शिलांग में पल-बढ़ रहे थे तो वहाँ के विधान-सभा भवन के दीवार पर किसी ने बड़े अक्षरों में लिख दिया था 'खासी बाय ब्लड, इंडियन बाय एक्सीडेंट'। मतलब -- 'मेरी पहचान, मेरा नस्ल, खासी है; हिंदुस्तानी तो महज इत्तेफ़ाक़ से हूँ।' जब उनके दोस्त नागालैंड या मणिपुर से कलकत्ता, दिल्ली, या मुंबई आ रहे होते थे तो वे कहते थे, 'हम इंडिया जा रहे हैं।' पूर्वोत्तर भारत के उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के राजनितिक इतिहास को हम दो भागों में बाँट सकते हैं। पहला भाग -- अंग्रेज़ी हुकूमत द्वारा इस क्षेत्र को भारत से जोड़ने का प्रयास। और, दूसरा भाग -- स्वतंत्र भारत में इस क्षेत्र के भारत से अलग होने के प्रयास। ये इतिहास लिखा है सम्राट ने अपनी विस्तृत मगर सुगम पुस्तक 'नार्थ-ईस्ट इंडिया -- अ पोलिटिकल हिस्ट्री' में। आइये सुनते हैं एक चर्चा उनकी किताब पर, सम्राट चौधरी के साथ। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) एक्स (ट्विटर) पर सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी का वेबसाइट 'नार्थ-ईस्ट इंडिया -- अ पोलिटिकल हिस्ट्री' अमेज़न पर सम्राट चौधरी द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर पॉडकास्ट में चर्चा की गई अन्य पुस्तकें -- हिस्ट्री ऑफ़ धर्मशास्त्र, लेखक पांडुरंग वामन काणे धर्मशास्त्र का इतिहास, लेखक पांडुरंग वामन काणे ‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।
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एपिसोड 12: 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' – रक्षंदा जलील
अगर कहीं उर्दू भाषा का ज़िक्र हो जाय, तो लोग उसकी तारीफ़ तो करते हैं, मगर अक्सर लगता है कि ये उर्दू-प्रेम महज शब्दों तक सीमित है। डॉक्टर रक्षंदा जलील अपनी किताब 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' के शुरुआती पन्नों में हिंदुस्तान में उर्दू के हाल पर सवाल तो उठाती हैं, मगर साथ-साथ हमको आश्स्वत भी करती हैं कि यहाँ उर्दू आज भी एक जीती-जागती, फलती-फूलती भाषा है। सादत हसन मंटो, इस्मत चुगताई, प्रेमचंद, और राजिंदर बेदी जैसे दिग्गज उर्दू लघु-कथा के लेखकों की दुनिया से आगे ले चलती, इस किताब में प्रस्तुत लघु-कहानियाँ मुख्यतः १९९० के बाद छपी हैं। इन कहानियों को चुना, और उनका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया है, डॉ जलील ने। प्रेम व टूटे दिलों की दास्तान, मौत के साये में जी रहे लोग, भुखमरी या दंगों के खौफ से जूझते लोग, निर्मम शहर में सुख के पल ढूंढते नौजवान – ये सब, और इसके अलावा और बहुत कुछ मिलेगा इस क़िताब के पन्नों में। आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं। 1. इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), और फेसबुक पर डॉ रक्षंदा जलील 2. 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' अमेज़न पर 3. रक्षंदा जलील द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर 4. रहमान अब्बास द्वारा लिखी गईं पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
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एपिसोड 10: अनदर सॉर्ट ऑफ़ फ्रीडम – गुरचरन दास
अगर आप की माँ आपसे कहती हों, बेटा, मेक अ लिविंग, मतलब अच्छा खाओ-कमाओ और इज़्ज़त-हैसियत के साथ जियो। और, उसके विपरीत, आपके पिता जी आपसे कहते हों, बेटा, मेक अ लाइफ, मतलब सार्थक ज़िन्दगी जियो, पैसे और प्रतिष्ठा के पीछे मत भागो। तो आप क्या करेंगे? अगर आप गुरचरन दास हैं तो आप दोनों चीज़ करते हैं। व्यस्क ज़िन्दगी के पहले तीन दशकों में मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करके एक बेहद सफल करियर बनाते हैं। फिर ५२ साल की उम्र से एक लोकप्रिय लेखक और बुद्धजीवी के रूप में जाने जाते हैं। आइये सुनते हैं, गुरचरन दास के साथ उनके रोचक संस्मरण, अनदर सॉर्ट ऑफ़ फ्रीडम यानी, एक अलग किस्म की आज़ादी, पर एक चर्चा। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) गुरचरन दास ट्विटर, फेसबुक, लिंक्ड इन पर अनदर सॉर्ट ऑफ़ फ्रीडम अमेज़न पर गुरचरन दास द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर रिमेम्बरेंस ऑफ़ थिंग्स पास्ट, लेखक मार्सेल प्रूस्ट ‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।
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एपिसोड 9: 'टाल टेल्स बाय अ स्माल डॉग' – ओमैर अहमद
दिल्ली से पूरब की ओर की ट्रेन या बस पकड़ने पर कानपूर-लखनऊ के आस-पास पहुँचने पर एक बॉर्डर आता है, मैप पर नहीं दिखता है -- 'मैं' और 'हम' का बॉर्डर। इस सीमा को पार करने के बाद लोग 'मैं' की जगह 'हम' का प्रयोग करने लगते हैं और आप जान जाते हैं कि अब आप उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग को छोड़ कर राज्य के पूर्वी भाग में आ गए हैं। लखनऊ, कानपूर, बनारस और ईलाहबाद के अलावा ये क्षेत्र गोरखपुर जैसे अन्य छोटे शहरों का भी है। अपनी कहानियों की किताब 'टाल टेल्स बाय अ स्माल डॉग' में ओमैर अहमद गोरखपुर की संकरी गलियों और बीते हुए वक़्त में टहलते-घूमते हुए, यहाँ के बाशिंदो की दास्ताँ का बयान करते हैं। आइये सुनते हैं, ओमैर अहमद के साथ उनकी नई कहनी-संग्रह पर एक चर्चा। (आप शो नोट्स sambandh-kakeki.com पर भी देख सकते हैं।) ओमैर अहमद द्वारा लिखी गईं पुस्तकें -- टाल टेल्स बाय अ स्माल डॉग जिमी द टेररिस्ट द स्टोरी टेलर्स टेल एनकाउंटर्स द किंगडम ऐट द सेंटर ऑफ़ द वर्ल्ड -- जरनीज़ इंटू भूटान
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एपिसोड 8: 'द ब्रोकन स्क्रिप्ट' – स्वप्ना लिडल
ईस्ट इंडिया कंपनी ने ११ सितम्बर सन १८०३ में पटपड़गंज की लड़ाई में मराठा ताकतों को हरा कर दिल्ली और उसके आसपास के छेत्रों पर कब्ज़ा पा लिया और इसके साथ ही दिल्ली के इतिहास में अंग्रेजी हुकूमत का दौर आरम्भ हुआ। एक तरफ लाल किले पर तख्तनशीन मुग़ल बादशाह शाह आलम, अकबर और बहादुर शाह ज़फर, और एक तरफ डेविड ऑक्टरलोनी, चार्ल्स मेटकाफ, और विलियम फ़्रेज़र जैसे अंग्रेजी रेजिडेंट हुक्मरान। एक तरफ मिर्ज़ा ग़ालिब, मोमिन, और ज़ौक़, तो एक तरफ देल्ही कॉलेज से जुड़े गणितज्ञ मास्टर राम चन्दर, और विद्वान सर सय्यद अहमद खान। नए स्कूल और कॉलेज, ज्ञान-विज्ञान, प्रिंटिंग प्रेस, टेलीग्राफ, और अख़बार की दिल्ली में मध्यकालीन और आधुनिक युगों के टकराव का बयान है, स्वप्ना लिडल की किताब 'द ब्रोकन स्क्रिप्ट'। (आप शो नोट्स sambandh-kakeki.com पर भी देख सकते हैं।) फेसबुक पर स्वप्ना लिडल इंस्टाग्राम पर स्वप्ना लिडल स्वप्ना लिडल द्वारा लिखी गयी पुस्तकें -- द ब्रोकन स्क्रिप्ट फोर्टीन हिस्टोरिक वॉक्स ऑफ़ डेल्ही शाहजहानाबाद – मैपिंग अ मुग़ल सिटी चांदनी चौक – द मुग़ल सिटी ऑफ़ ओल्ड डेल्ही कनॉट प्लेस एंड द मेकिंग ऑफ़ न्यू डेल्ही द टू डेल्हीस – ओल्ड एंड न्यू
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एपिसोड 7: अक्रॉस द यूनिवर्स -- द बीटल्स इन इंडिया - अजोय बोस
जॉन लेनन, पॉल मक्कार्टनी, जॉर्ज हैरिसन, रिंगो स्टार -- क्या आज से ५०० साल बाद, एक आम इंसान रॉक म्यूजिक के बैंड 'द बीटल्स' के सदस्यों का नाम से वाकिफ होगा? शायद ये सवाल इतना अटपटा भी नहीं है। ये तो हक़िकत है कि आज एक सत्रह साल का युवक बीटल्स के गानों को सुन के ठीक उसी तरह झूमता है, जिस तरह ६० साल पहले उसके दादा-दादी इन्हीं गानों को सुन के झूमा करते थे। महज २५ साल के उम्र में इंग्लैंड के लिवरपूल शहर के ये चार लड़के शायद इतनी शोहरत और धन-दौलत को संभाल नहीं पा रहे थे और चैन व तठस्थता की खोज ने उनको हिन्दू धर्म और अध्यात्म की ओर खींचा। वे महर्षि महेश योगी के निमंत्रण पर उनके ऋषिकेश स्थित आश्रम गए। आश्रम मैं क्या हुआ इसका विवरण मिलेगा आपको अजोय बोस की पुस्तक 'अक्रॉस द यूनिवर्स -- द बीटल्स इन इंडिया' में। सुनिए अजोय के साथ बीटल्स और महर्षि महेश योगी पर एक दिलचस्प चर्चा। (आप शो नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) फेसबुक पर अजोय बोस ट्विटर पर अजोय बोस इंस्टाग्राम पर अजोय बोस अजोय बोस द्वारा लिखी गईं पुस्तकें – अक्रॉस द यूनिवर्स -- द बीटल्स इन इंडिया बहनजी -- अ पोलिटिकल बायोग्राफी फॉर रीज़न्स ऑफ़ स्टेट -- डेल्ही अंडर एमर्जेन्सी अजोय बोस द्वारा निर्देशित बीटल्स पर फिल्म – द बीटल्स एंड इंडिया
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एपिसोड 6: 'अमंग द चैटराटी' – कनिका गहलौत
साल १९९९, अप्रैल महीने का आखिरी दिन -- दिल्ली में, क़ुतुब मीनार से सटे हुए, टामारिंड कोर्ट नाम के रेस्त्रां में एक पेज-३ पार्टी चल रही थी। पार्टी में, जेसिका लाल जो कभी फैशन-मॉडल हुआ करती थीं, 'सेलिब्रिटी बारटेंडर' बनी हुई थीं। रात के दो बजे, जब जेसिका ने एक नेता जी के लड़के को ड्रिंक्स देने से इंकार कर दिया तो उसने गोली चला कर जेसिका को वहीं मार डाला। इस सनसनीखेज हत्याकाण्ड को कल्पित रूप देते हुए, पत्रकार कनिका गहलौत ने अपने अंग्रेज़ी उपन्यास 'अमंग द चैटराटी' की शुरुआत की है। २००२ में प्रकाशित, दिल्ली की सेलिब्रिटी, फैशन, राजनीती, और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुए असली हस्तियों और वास्तविक घटनाओं पर आधारित ये उपन्यास, छपने के बाद ख़ासे चर्चे में रही। आइये किताब के छपने के बीस साल पश्चात, सुनते हैं कनिका के साथ उनके उपन्यास पर एक चर्चा। कनिका का 'X' (ट्विटर) हैंडल -- @kanikagahlaut अमंग द चैटराटी ऐमज़ॉन पर उपलब्ध है
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एपिसोड 5: 'ज़िक्र -- इन द लाइट एंड शेड ऑफ़ टाइम' - मुज़फ्फर अली
एडवरटाइजिंग के क्षेत्र में अफ़सर, चित्रकार, फिल्म निर्माता, फैशन डिज़ाइनर, सूफी-संगीत समारोह के आर्गेनाइजर, सूफी भक्त, शेरोशायरी के आशिक़, अवध के तालुकदार खानदान के वारिस – मुज़फ्फर अली ये सब कुछ हैं। अगर इन्होंने अपनी ज़िन्दगी के लम्बे सफर में बहुत कुछ देखा है, तो वो इसलिए क्योंकि इन्होंने बहुत कुछ किया, और इसलिए भी क्योंकि इन्होंने बहुत कुछ करने की कोशिश की। ये बात समझ में आती है इनके आत्मकथा, 'ज़िक्र - इन द लाइट एंड शेड ऑफ़ टाइम' को पढ़ के। सुनिए, मुज़फ्फर अली के साथ उनकी आत्मकथा पर एक चर्चा। (आप शो नोट्स sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।) इंस्टा पर मुज़फ्फर अली मुज़फ्फर अली द्वारा लिखी गईं पुस्तकें — नॉन फिक्शन ज़िक्र मुज़फ्फर अली के कुछ चहेते गीत -- फिल्म ‘अभी ना जाओ छोड़कर’ का गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर’ फिल्म ‘रज़िया सुल्तान’ का गीत, ‘ऐ दिल-ए-नादाँ’ फिल्म ‘उमराओ जान’ का गीत, ‘ये क्या जगह है दोस्तों’
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एपिसोड 4: 1984 – जॉर्ज ऑरवेल, हिंदी अनुवाद – अभिषेक श्रीवास्तव
'बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू' यानी 'बड़े भइया आपको देख रहे हैं -- आज जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास '१९८४' की ये लाइन पुरे विश्व में एक चेतावनी के रूप में जानी जाती है। विचार, भाषा, सामाजिक और राजनैतिक संरचना -- इन सब के सम्बन्धो को एक भयावह, व तकनिकी रूप से उन्नत, आने-वाले कल में चित्रार्थ करने के लिए १९४८ में छपा ये उपन्यास आज भी दुनिया भर में पढ़ा जाता है। सुनिए '१९८४' पर एक चर्चा अभिषेक श्रीवास्तव के साथ जिन्होंने इस उपन्यास का हिंदी में अनुवाद किया है। (आप शो नोट्स sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।) फ़ेसबुक पर अभिषेक श्रीवास्तव 1984 (हिंदी अनुवाद) 1984 (अंग्रेज़ी में) जॉर्ज ऑरवेल द्वारा लिखी गईं पुस्तकें, अमेज़न वेबसाइट पर अभिषेक श्रीवास्तव द्वारा लिखी गईं पुस्तकें – नॉन फिक्शन -- आम आदमी के नाम पर आम आदमी दे नाम उट्टे देशगाँव कच्छ कथा
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एपिसोड 3: द पॉपुलेशन मिथ - इस्लाम, फैमिली प्लानिंग एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया - डॉ. एस. वाई. कुरैशी
'भारत के मुसलमानों की जनसंख्या तेज गति से बढ़ रही है और इससे देश को खतरा है।' ये बात अक्सर सुनने को मिलती है। मगर जो 'मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर' प्रायः सांप्रदायिक तनाव और भय का कारण बन जाता है, उसकी सच्चाई क्या है? तथ्य और आंकड़ों के माध्यम से ये बात समझाते हैं, भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस. वाई. कुरैशी अपनी पुस्तक 'द पॉपुलेशन मिथ' में। सुनिए डॉ. कुरैशी के साथ इस विवादास्पद मुद्दे पर एक रोचक चर्चा। (आप शो नोट्स sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।) ट्विटर पर डॉ. एस. वाई. कुरैशी डॉ. एस. वाई. कुरैशी द्वारा लिखी गईं पुस्तकें – नॉन फिक्शन द पॉपुलेशन मिथ जनसंख्या का मिथक ऐन अनडोक्यूमेन्टेड वंडर लोकतंत्र के उत्सव की अनकही कहानी द ग्रेट मार्च ऑफ़ डेमोक्रेसी हरयाणा रीडिस्कवर्ड हाली कवी एक रूप अनेक ओल्ड देल्ही — लिविंग ट्रेडिशंस सोशल मार्केटिंग फॉर सोशल चेंज, १९९६ प्रकाशक – अजंता बुक्स इंटरनेशनल, मेरठ, उत्तर प्रदेश -- २५० ००२
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एपिसोड 2: शैडो सिटी – अ वुमन वॉक्स काबुल - तरन खान
वर्ष २००६, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान हुकूमत को गिरे हुए पाँच साल हो चुके हैं — तरन खान पहली बार हिंदुस्तान से अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पहुँचती हैं तो उनको लगता है कि वे एक अजनबी शहर में आयी हैं, और साथ-साथ यह भी लगता है कि ऐसे शहर में आई हैं जिससे उनका पुराना परिचय हो। काबुल में उनकी पहचान शायरों, फिल्म निर्माताओं, पत्रकारों और शहर के अन्य बाशिंदो से होती है। वक़्त के साथ, वे पाती हैं कि उनकी कल्पना के शहर और उनकी हकीकत के शहर में फ़र्क़ है। आइये सुनते हैं, तरन खान के साथ उनकी किताब 'शैडो सिटी -- अ वुमन वॉक्स काबुल' पर एक चर्चा। (आप शो नोट्स, sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर तरन खान तरन खान द्वारा लिखी गईं पुस्तक — नॉन फिक्शन शैडो सिटी – अ वुमन वॉक्स काबुल पॉडकास्ट में चर्चित अन्य किताबें -- नो गुड मेन अमंग द लिविंग -- अमेरिका, द तालिबान, एंड द वॉर थ्रू अफ़ग़ान आईज, लेखक आनंद गोपाल तरन के दो चहेते गीत फिल्म काबुलीवाला का गीत, ऐ मेरे प्यारे वतन अहमद ज़हीर का गीत, लैली लैली जान ‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।
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एपिसोड 1: अकबर ऑफ़ हिंदुस्तान - पार्वती शर्मा
एक बेहतरीन योद्धा, कुशल प्रशासक, और दूरदृष्टिवान शासक — शहंशाह अकबर ने सम्पूर्ण उत्तरी हिन्द महाद्वीप में अपना साम्राज्य स्थापित किया और अपने बहुलवादी (प्लुरलिज़्म) एवं सहनशीलतावादी (टॉलरेंस) नीतियों द्वारा वर्तमान और भविष्य के हिंदुस्तान के लिए 'विविधता में एकता' की मिसाल खड़ी की। एक १३ साल का लड़का जिसके पिता की मौत हो चुकी थी, और जो महत्वाकांक्षी दरबारियों, सिपहसालारों, और अमीरों से घिरा हुआ था, विश्व के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक कैसे बन गया? सुनिए, पार्वती शर्मा के साथ एक चर्चा उनकी किताब 'अकबर ऑफ़ हिंदुस्तान' यानी 'हिन्दुस्तान का अकबर' पर। (हमारा वेबसाइट है, sambandh-kakeki.com) इंस्टाग्राम पर पार्वती शर्मा पार्वती शर्मा द्वारा लिखी गईं पुस्तकें — नॉन-फिक्शन — अकबर ऑफ़ हिंदुस्तान जहाँगीर द लास्ट लाइट ऑफ़ देल्ही -- मिर्ज़ा फ़रहतुल्लाह बेग़ (लेखक), पार्वती शर्मा (अनुवादक), सुलैमान अहमद (अनुवादक) उपन्यास — क्लोज़ टू होम कहानी संग्रह — द डेड कैमल एंड अदर स्टोरीज़ बच्चों के लिए — द स्टोरी ऑफ़ बाबर रट्टू एंड पूरीज़ एडवेंचर्स इन हिस्ट्री पॉडकास्ट में चर्चित अन्य किताबें — अर्धकथानक, लेखक बनारसीदास लॉर्ड्स ऑफ़ द डेक्कन, लेखक अनिरुद्ध कनिसेट्टी पार्वती का एक चहेता गीत — एम. एस. सथ्यु कृत फिल्म, गरम हवा का गीत आक़ा सलीम चिश्ती मौला सलीम चिश्ती ‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि है, पिक्साबे के सौजन्य से।
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