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मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan cover art

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मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan — 672 episodes · page 2 of 7

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Title
101

1 Peter 1:6-9 विश्वासी अपने उद्धार के कारण दुःखों के मध्य आनन्द मनाते हैं।

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102

1 Peter 1:1-6 विश्वासीगण परमेश्वर की अपार दया के लिए उसकी स्तुति करते हैं।

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103

Genesis 10:1-11:32 यहोवा अपने लोगों को बचाने हेतु सब राष्ट्रों पर राज्य करता है।

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104

Genesis 8:20-9:29 बिना परमेश्वर के अनुग्रह के, मनुष्य की धार्मिकता सदा परमेश्वर के स्तर से कम पायी जायेगी।

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105

Genesis 6:9-8:19 परमेश्वर दुष्टों का न्याय करता है परन्तु धर्मियों को बचाता है।

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106

परम (Absolute), सम्प्रभु (Sovereign), सर्वशक्तिमान (Almighty) प्रेम

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107

 जब परमेश्वर अपनी इच्छा के विरुद्ध कार्य करता है

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108

परमेश्वर प्रदत्त विरोधी और परमेश्वर प्रदत्त विश्वास

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109

परमेश्वर का अन्तिम निर्णायक शब्द

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110

सुसमाचार का लक्ष्य

111

चिन्ता के विरुद्ध अस्त्र-शस्त्र

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112

सम्पत्ति और सम्बन्धियों को जाने दो

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113

यीशु द्वारा आनन्द का पीछा करना

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114

ऐसा क्लेश जो विश्वास को दृढ़ करता है

115

Genesis 5:1-6:8 पाप मृत्यु की ओर ले जाता है, परन्तु धार्मिकता जीवन की ओर।

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116

Genesis 2:4-25 परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में सृजा है, अपनी आराधना करने के लिए।

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117

Genesis 3:1-24 सृष्टिकर्ता परमेश्वर से विद्रोह का परिणाम लज्जा, श्राप और जीवन से अलगाव है।

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118

Genesis 4:1-26 यदि परमेश्वर दया न दिखाए तो विद्रोह अत्यधिक पाप की बहुतायत को उत्पन्न करेगा।

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119

सेवा करने के लिए आपको क्या प्रेरित करता है?

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120

डर जो हमें अपनी ओर खींचता है।

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121

विश्वास दोष-बोध, लोभ, और भय को निकाल देता है

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122

लालच नामक घातक फन्दा।

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123

हम विश्वास के द्वारा आत्मा को अनुभव करते हैं

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124

मैं प्रत्येक परिस्थिति में सन्तुष्ट रह सकता हूँ।

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125

विश्वास उसका आदर करता है जिस पर यह भरोसा करता है।

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126

अवसाद का सामना करने हेतु यीशु के छः उपाय

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127

बचाने वाला विश्वास क्षमा से प्रेम करता है

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128

हमें पवित्रता के लिए कैसे संघर्ष करना है।

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129

ख्रीष्ट ने कड़वाहट पर विजय कैसे पाई

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130

वह सन्तुष्टि जो पाप को पराजित करती है।

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131

अनुग्रह क्षमादान है — और साथ में सामर्थ्य भी!

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132

मनुष्य का भय मानने का अपराध।

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133

व्यावहारिक प्रेम की दृढ़ जड़।

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134

असहायों के लिए एक शरणस्थान

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135

पाप क्या है?

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136

Genesis 1:1-2:3 परमेश्वर सृष्टिकर्ता है, इसलिए उसकी आराधना करो।

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137

Philemon 1:8-25 सुसमाचार की सच्ची समझ स्वयं को क्षमा और मेल मिलाप में प्रदर्शित करेगी।

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138

Philemon 1:-1-7 सच्चे सुसमाचार की समझ ख्रीष्ट में विश्वास और विश्वासियों के लिए प्रेम में दिखाई देगा।

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139

Colossians 4:7-18 सुसमाचार ऐसे सम्बन्धों को उत्पन्न करता है जो आत्मिक परिपक्वता को बढ़ावा देते हैं।

140

अविश्वासियों के लिए कैसे विनती करें।

141

अनन्त जीवन क्या है?

142

Colossians 4:2-6 सुसमाचारीय जीवन के लिए प्रार्थना आवश्यक है।

143

Colossians 4:1 सुसमाचार विश्वासियों को परमेश्वर का भय मानने वाले स्वामी बनने की माँग करता है।

144

Colossians 3:22-25 सुसमाचार ख्रीष्टियों को विश्वासयोग्य कर्मचारी के रूप में परिवर्तित करता है।

145

Colossians 3:21 सुसमाचारीय लालन-पालन बच्चों को आनन्दपूर्वक आज्ञापालन के लिए उत्साहित करता है।

146

Colossians 3:20 सुसमाचार द्वारा सामर्थ पाकर सन्तानें माता-पिता का आज्ञा पालन करेंगे।

147

सर्वोच्च स्वतन्त्र प्रेम

148

Psalm 66:1-20 पराक्रमी परमेश्वर अपने लोगों को बन्धुवाई से छुटकारा देता है, इसलिए उसकी आराधना करें।

149

Psalm 65:1-13 परमेश्वर प्रावधान करने वाला परमेश्वर है, इसलिए उसकी स्तुति करें।

150

Colossians 3:19 सुसमाचार पतियों को निर्देश देता है कि अपनी पत्नियों से प्रेम करें और उनके साथ कटु व्यवहार न करें।

151

Colossians 3:18 सुसमाचार पत्नियों को अपने पति के अधीन रहने में सहायता करता है।

152

पाँचवीं वाणी- मैं प्यासा हूं!

153

छठी वाणी- पूरा हुआ

154

चौथी वाणी- "एली एली लमा शबक्तनी? हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया!"

155

पुनरुत्थान उद्धार की निश्चयता को प्रदान करता है।

156

सातवी वाणी- "हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं"

157

तीसरी वाणी- "हे नारी, देख यह तेरा पुत्र है!"

158

दूसरी वाणी- "मैं तुझसे सच कहता हूं, कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा!"

159

पुनरुत्थान क्या है?

160

पहली वाणी- "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं"

161

शुभ शुक्रवार क्या है?

162

Psalm 64;1-10 परमेश्वर न्यायी-राजा है इसलिए छुटकारे के लिए उसकी शरण में आओ।

163

भजन संहिता 63:1-11 परमेश्वर हमें सच्ची संतुष्टि प्रदान करता है।

164

Colossians 3:12-17 सुसमाचार माँग करता है कि हम पवित्रता और ईश्वरभक्ति का जीवन जीएँ।

165

Psalm 62:1-12 सामर्थी परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।

166

Matthew 6:19-24 अपनी सन्तुष्टि धन में नहीं परन्तु परमेश्वर में खोजिए।

167

मत्ती 6:19-24 एक विश्वासी का स्वामी परमेश्वर होगा, धन नहीं।

168

Colossians 2:1-5 जो यीशु के पीछे चलते हैं वे कठिनाइयों का सामना अवश्य ही करेंगे।

169

Mark 4_21-25 आप जितनी अच्छी रीति से परमेश्वर के वचन को सुनेंगे,

170

John 4;31 39 सुसमाचार बोने और काटने हेतु सहभागी होने में आनन्दित हों।

171

Colossians 3:5 -11 अश्लीलता से भागो #harshitsingh

172

Colossians 3:5 -11 अश्लील बातों और वासना का घात करो।

173

Colossians 3:5 -11 सुसमाचार माँग करता है कि हम अपनी देह में बचे हुए पाप को घात करें।

174

Exdous 20:18-24:18 परमेश्वर का भय मानो क्योंकि वह पवित्र परमेश्वर है।

175

Colossians 3:1 -4 सुसमाचार हमें स्वर्ग की ओर देखने के लिए और आने वाली महिमा के लिए लालायित होने के लिए सहायता करता है।

176

Colossians 2:16 -23 सुसमाचार हमें समन्वयवाद, विधिवाद एवं वैराग्यवाद से स्वतन्त्र करता है।

177

Colossians 2:8-15 यीशु के कारण लोग हमारा तिरस्कार करेंगे।

178

Colossians 2:8-15 परमेश्वर का सिद्ध पुत्र हमारे पापों के लिए क्रूस पर बलिदान हो गया।

179

Colossians 2:8-15 सुसमाचार हमें ख्रीष्ट द्वारा उद्धार के विजयी कार्य पर भरोसा करने के लिए बुलाता है।

180

Colossians 1_9-14 क्या आप प्रभु के द्वारा दिए गए उद्धार में संतुष्ट हैं।

181

Colossians 2:6-7 सुसमाचार विश्वासियों को विश्वास में दृढ़ और अत्यंत धन्यवादी बनने में समर्थ करता है।

182

The Freeness Of Grace I सेंतमेंत में दिया गया अनुग्रह

183

सुसमाचार कठिनाईयों में बने रहने की शक्ति देता है।

184

Colossians 2_1-5 जो यीशु के पीछे चलते हैं वे कठिनाइयों का सामना अवश्य ही करेंगे

185

Colossians 1:24-29 सुसमाचार विश्वासियों को कलीसिया हेतु दुःख उठाने के लिए सामर्थी बनाता है।

186

Colossians 1:23 सुसमाचार पापियों का मेल परमेश्वर से कराता है, इसलिए आशा में लगे रहिए।

187

क्रिसमस के तीन उपहार | दिन- 25

188

क्रिसमस के दो उद्देश्य | दिन- 24

189

परमेश्वर का अवर्णनीय उपहार | दिन- 23

190

कि तुम विश्वास करो | दिन- 22

191

अनादिकाल के प्राचीन का जन्म | दिन- 21

192

क्रिसमस की एकता | दिन- 20

193

क्रिसमस स्वतन्त्रता के लिए है। | दिन- 19

194

Colossians 1:21-23 सुसमाचार पापियों का मेल परमेश्वर से कराता है, इसलिए आशा में लगे रहिए।

195

मिशन्स के लिए क्रिसमस का प्रतिरूप | दिन- 18

196

सबसे बड़ा उद्धार जिसकी कल्पना की जा सकती है | दिन - 17

197

परमेश्वर की सबसे सफल असफलता | दिन - 16

198

क्रिसमस पर जीवन और मृत्यु | दिन -15

199

अपने लोगों के लिए क्रिसमस को वास्तविक बनाना | दिन - 14

200

सर्वश्रेष्ठ वास्तविकता आ चुकी है। | दिन - 13